माता-पिता बनना एक विशेष और अदभुत अनुभव है। चाहे आपके बारह बच्चे हों, तब भी आप सीख ही रहे होते हैं। हो सकता है कि आपने ग्यारह बच्चे अच्छी तरह पाले हों, मगर बारहवें में आपको परेशानी हो सकती है।

ईस लिए आप ये बाते ध्यान में रखे :

• सही माहौल खडा करना :

       जरूरी माहौल तैयार करना बच्चों के पालन-पोषण में बहुत ही ख़ास भूमिका निभाता है। इसलिए आपको सही तरह का माहौल तैयार करना चाहिए, जहां खुशी, प्यार, परवाह और अनुशासन की एक भावना आपके अंदर भी और आपके घर में भी हो। आप अपने बच्चे के लिए इतना तो कर ही सकते हैं कि उसे प्यार और सहारा दे सकते हैं।
         
           उसके लिए ऐसा प्यार भरा माहौल बनाएं जहां बुद्धि का विकास कुदरती तरीके पर हो। आप उसके साथ बैठकर जीवन को बिल्कुल नयेपन के साथ देखें, जिस तरह वह देखता है। कुछ लोग तो ये समज लेते हैं कि जैसे ही बच्चा पैदा होता है, शिक्षक बनने का समय शुरू हो जाता है। जब की एक बच्चा आपके घर में आता है, तो यह शिक्षक बनने का नहीं, सीखने का समय होता है।

• उसे ख़ुद सोचने का मौका दो :

     जरूरी नहीं है कि आपका बच्चा जीवन में वही करे, जो आप सोचते है या आपने किया हो । आपके बच्चे को कुछ ऐसा भी करने दो जो वो मन से चाहता हो.

       ये हमारी जिम्मेदारी है, कि वे हम ऐसा माहौल बनाए जिससे हमारि अगली पीढ़ी हमसे कम से कम एक कदम आगे हो। यह बहुत ही जरुरी है कि अगली पीढ़ी थोड़ी और खुशी से, कम डर, कम पक्षपात, कम उलझन, कम नफरत और कम कष्ट के साथ जीवन जिए। हमें इसी लक्ष्य के साथ चलना चाहिए.
        
         अगली पीढ़ी के लिए हमारा योगदान यह होना चाहिए कि हमारी इस दुनिया में हम एक ऐसा इंसान छोड़ कर जाएं जो हमसे कम से कम थोड़ा बेहतर तो जरुर हो.

• बच्चे की जरूरतों को जानिये :

कुछ माता-पिता अपने बच्चों को खूब मजबूत बनाने की इच्छा या चाह रखते हुए उन्हें बहुत ज्यादा कष्ट में डाल देते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे वह बनें जो वे खुद नहीं बन पाए। अपने बच्चों के जरिये अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने की कोशिश में कुछ माता-पिता अपने बच्चों के प्रति बहुत सख्त हो जाते हैं।
   
           दूसरे माता-पिता मानते हैं कि वे अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और अपने बच्चों को इतना सिर चढ़ा लेते हैं कि उन्हें इस दुनिया में लाचार और बेकार बना देते हैं।

• उसे अपने तरीके से रहने दें :

       अगर माता-पिता अपने बच्चों की सही मायने में परवाह करते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों को इस तरह पालना चाहिए कि बच्चे को माता-पिता की हर छोटी छोटी बातो पर जरूरत न हो। प्यार की प्रक्रिया हमेशा आजाद करने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए, उलझाने वाली नहीं। इसलिए जब बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे को चारों ओर देखने-परखने, प्रकृति के साथ और खुद अपने साथ समय बिताने दें। प्यार और सहयोग का माहौल बनाएं।

• ख़ुद भी आनंदित और शांत रहें :

          अगर आप अपने बच्चे का पालन-पोषण अच्छी तरह करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको खुद खुश रहना चाहिए। अगर आपके बच्चे को घर में रोजाना तनाव, गुस्सा, डर, चिंता और ईर्ष्या देखने को मिलते हैं, तो उसका क्या होगा? पक्के तौर पर वह केवल इन्हीं से सीखेगा, है न? अगर आप वाकई अपने बच्चे का अच्छी तरह पालन-पोषण करने का इरादा रखते हैं, तो आपको खुद को एक प्यार करने वाले, आनंदित और शांत इंसान में बदलना होगा।

        अगर आप खुद को बदलने के काबिल नहीं हैं, तो अपने बच्चे को अच्छे से पालने का सवाल कहां उठता है? अगर हम वाकई अपने बच्चे को अच्छी तरह पालना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि क्या हम खुद को रूपांतरित कर सकते हैं।

         जो भी माता-पिता बनना चाहते हैं, उन्हें एक साधारण सा प्रयोग करना चाहिए। उन्हें बैठकर देखना चाहिए कि उनके जीवन में क्या ठीक नहीं है और उनकी जिंदगी के लिए क्या अच्छा होगा। बाहरी दुनिया के लिए नहीं, बल्कि खुद उनके लिए। अगर आप अपने बारे में – अपना व्यवहार, बातचीत, रवैया और आदतें बदल सकते हैं, तो आप अपने बच्चे को भी समझदारी से संभाल सकते हैं.

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“Life lover” Since Born. Rashmi Panchal is enthusiastic Gujarati Writer, Dancer, Copy writer, Singer. She used to spend her whole day on her hobby related works. She loves her Child most ” Sneh”

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